मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत के लिए संजीवनी बना रूस, 82% बढ़ी तेल सप्लाई
मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत ने तेजी से रणनीति बदलते हुए रूस से तेल आयात बढ़ा दिया. मार्च में रूसी तेल सप्लाई 82% उछलकर 1.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन पहुंच गई. आयात में हिस्सेदारी भी दोगुनी होकर 45% से ज्यादा हो गई, जिससे देश में तेल सप्लाई पूरी तरह स्थिर बनी रही.
पश्चिम एशिया में इस समय भारी उथल-पुथल मची हुई है. 28 फरवरी से इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े संघर्ष ने दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों की सांसें अटका दी हैं. इस युद्ध का सीधा असर भारत पर भी पड़ सकता था, क्योंकि हमारी तेल जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा होता है. जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की सप्लाई रुकती है, तो आम जनता को पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों और किल्लत का डर सताने लगता है. लेकिन, इस बार भारत सरकार की कूटनीति और हमारी रिफाइनरियों की दूरदृष्टि ने देश को एक बड़े ऊर्जा संकट से न सिर्फ सुरक्षित निकाला है, बल्कि दुनिया के सामने एक मजबूत मिसाल भी पेश की है.



